भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.

Friday, March 15, 2013

कूड़ा संस्कृति

हमारे अपार्टमेन्ट में आती है,
नगर निगम की कूड़ा गाड़ी,
रिकार्डेड मेसेज बजता है,
कृपया कूड़ा सड़क पर न फेंकें,
गाड़ी में रखे कूड़ेदान में डालें |

एक दिन एक निवासी ने कहा,
धन्यवाद,
हम कूड़ा सड़क पर नहीं फेंकते,
हम कूड़ा पार्क में फेंकते हैं,
और कूड़ा कूड़ेदान में,
नहीं यह हमारी संस्कृति नहीं है |


Sunday, February 3, 2013

दरबारे खास

चलो दिलदार चलें,
उनके दरबार चलें.
छपती है उनकी फोटो,
जिन सरकारी विज्ञापनों में,
लेकर अपने साथ सभी,
आओ वह अखवार चलें.
झूठ और बेईमानी,
चुगलखोरी, चापलूसी,
भ्रष्टाचार के फूलों से बना,
पहन कर वह हार चलें.
पिछला जन्म याद नहीं,
अगला जन्म पता नहीं,
इस जन्म में मौज करलें,
बस बन कर मक्कार चलें.
राष्ट्रभक्ति, समाजसेवा,
ग़रीबों का दर्द,
पीड़ितों की पीड़ा,
यह सब हैं बेकार, चलें.

Monday, January 28, 2013

सोते रहो ग्राहक

सरकार कहती है जागो ग्राहक,
पर खुद सोती रहती है,
बीच-बीच में जागती है,
जागते ही महंगाई बढ़ जाती है,
मैं कहता हूँ,
क्या करोगे जाग कर?
जागोगे तो भूख लगेगी,
सोते रहो,
सपने में खाना खाते रहो. 

मुस्तैद सरकार

जनता के पैसे से विज्ञापन छपवाना,
उसमें अपनी फोटो छपवाना,
खोखले वादे करना,
जैसे हर प्लेट में खाना,
बस यही एक काम,
मुस्तैदी से करती है सरकार. 

Sunday, January 27, 2013

खेल खत्म, पैसा हजम

उन्होंने नारे लगाए,
प्रदर्शन और अनशन किया,
भ्रष्टाचार खत्म करना है,
जनलोकपाल लाना है,
जनता साथ खडी हो गई.

जन आंदोलन ने जोर पकड़ा,
लगा जनलोकपाल आ जाएगा,
पर सत्ता की भूख जाग उठी,
पहले हम पार्टी बनायेंगे,
फिर सत्ता में आयेंगे,
जनता हमें मंत्री बनाए,
हम जन लोकपाल बनाएंगे. 

Saturday, January 26, 2013

पैसे जनता के, फोटो उनके

वह छपवाती हैं अपने फोटो,
जनता के पैसे से खरीदे,
हर सरकारी विज्ञापन में.
मैं भारत का नागरिक,
रोज अपमानित होता हूँ,
उनके फोटो देख कर,
अखवारों में. 

गणतंत्र दिवस

शर्मा जी आज दुखी थे,
गणतंत्र दिवस शनिवार को आया,
छुट्टी एक बेकार गई.
मुझे याद आया,
भामाब्यूरो ने मनाया था,
विश्व मानक दिवस,
१५ अक्टूबर को,
क्योंकि रविवार था,
१४ अक्टूबर को.
अगर ब्यूरो को मिलती जिम्मेदारी,
गणतंत्र दिवस मनाने की,
तो इस वर्ष मनाया जाता गणतंत्र दिवस.
२८ जनवरी को. 

Friday, January 25, 2013

सही और गलत

जिन लोगों पर,
पुलिस ने लाठी चलाई,
उन्हें सेल्यूट किया,
मुख्य न्यायाधीश ने.
गिरेसचिव ने तारीफ़ की,
पुलिस आयुक्त की,
गिरेमंत्री सहमत हुए,
पीएम ने कहा जरूरी था,
लाठी चलाना. 

कौन सही है?
कौन गलत है? 

गृह (गिरे) मंत्री

उन्हें खुश करने के लिए,
गृह मंत्री गिर पड़े, 
गिरते चले गये,
इतना गिरे,
लोगों ने उनका नाम,
गिरे मंत्री रख दिया.  

Sunday, January 20, 2013

रोल मोडल

महानिदेशक ने कहा,
उच्च आचरण अपनाएँ,
अपने कार्य छेत्र में,
रोल मोडल बनें,
यह सन्देश दे कर,
महानिदेशक,
विदेश यात्रा पर चले गये.

आरटीआई का फायदा


आरटीआई से एक फायदा हुआ,
पहले शिकायत करते थे,
नतीजा पता नहीं चलता था,
अब शिकायत करते हैं,
आरटीआई से पता करते हैं,
नतीजा पता चल जाता है,
शिकायत पर कुछ नहीं हुआ. 

Friday, August 5, 2011

मनमोहन का सरकारी लोकपाल


कल से शर्माजी चुप हैं,
कोई शिकायत नहीं कर रहे,
वर्माजी से रहा नहीं गया,
क्या हुआ शर्माजी?
पूरा दिन पूरी रात बीत गयी,
किसी से कोई शिकायत नहीं,
शर्माजी ने गहरी सांस ली,
आदत डाल रहा हूँ,
शिकायत न करने की,
जेल और जुर्माना,
दोनों हो सकते हैं,
सरकारी लोकपाल आ रहा है,
शिकायत करने वालों के खिलाफ. 

Sunday, July 31, 2011

लायक बेटा !!! ???

माँ मैं लायक हूँ न,
किस ने कहा बेटा?
पिग्गी अंकल ने,
किस के लिए बेटा?
पीएम बनने के लिए,
क्या मन्नू अंकल लायक हैं?
वह तो नालायक हैं माँ,
तुम ही तो कहती हो माँ,
परेशान मत हो बेटा,
पर वह हँसते हैं माँ,
कौन बेटा?
भारत के आम आदमी माँ,
वह पिग्गी पर हँसते हैं बेटा,
उन पर क्यों माँ?
उस की बेबकूफी पर बेटा,
तुम्हें लायक कहता है न.

Wednesday, February 9, 2011

एहसान फरामोश आम आदमी

बेशर्म आम आदमी,
हर समय शिकायत करता है,
सरकार ने यह नहीं किया,
सरकार ने वह नहीं किया,
बेबकूफ यह भी नहीं जानता,
सरकार आम आदमी से बनती है,
आम आदमी से चलती नहीं,
सरकार बनाने की कीमत दी थी तुझे,
दारू, मुर्गा, कम्बल और ढेर आश्वासन,
साला सब भूल गया,
एहसान फरामोश कहीं का,
कितनी दरियादिल है सरकार,
हर पांच साल बाद आती है,
और बांटती है दारू, मुर्गा, कम्बल,
पुराने और नए-नए आश्वासन,
पर बेशर्म आम आदमी,
करता रहता है हर समय शिकायत.

विदेशी बेंक, काला धन और सरकार

एक विदेशी बेंक ने पूछा,
क्यों जानना चाहती है सरकार?
भारतीय खाताधारियों के नाम,
भारत सरकार ने बताया,
देश का धन चुराया है उन्होंने,
अदालत कहती है धन वापस लाओ,
बेंक मुस्कुराया और पूछा,
क्या सरकार भी यही चाहती है?
सरकार शर्मा गई,
पर दूसरे छण गरमा गई,
अदालत सीमा लांघ रही है,
हर काम में टांग अड़ा रही है,
अम्मा को यह अच्छा नहीं लगता,
खाताधारियों के नाम बताइये,
बैसे अदालत की तो ऐसी-तैसी,
उन्हें तो भैय्या अपना हिस्सा चाहिए.
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