एक दिन अखबार में खबर आई,
एक सिरफिरे ने पीआइएल लगा दी,
कामनवेल्थ साईट्स पर,
हो रहा है अमानवीय व्यवहार,
मजदूरों के साथ,
हाई कोर्ट ने कमेटी बना दी,
कमेटी ने सच्चाई बता दी,
जानवरों से बदतर हालात हैं मजदूरों के,
न्यूनतम वेतन नहीं मिलता,
ओवरटाइम का पैसा नहीं मिलता,
सरकार सक्रिय हो गई,
खबर अखवार से गायब हो गई.
हम आज ऐसे समाज में रहते हैं जो बहुत तेजी से बदल रहा है और हम सबके लिए नए तनावों की स्रष्टि कर रहा है. पर साथ ही साथ समाज में घट रही बहुत सी घटनाएं हमारे चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं. हमारे तनाव, भले ही कुछ समय के लिए, कम हो जाते हैं. हर घटना का एक हास्य-व्यंग का पहलू भी होता है. इस ब्लाग में हम उसी पहलू को उजागर करने का प्रयत्न करेंगे.
भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.
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Wednesday, June 23, 2010
Tuesday, March 23, 2010
दुनिया की सबसे महंगी जेबकटी
कल फिर मेरी जेब कट गई,
जेब क्या कटी, ऐसा लगा,
जैसे दिन दहाड़े बाज़ार में,
किसी ने मेरी कमीज़ उतार ली,
और मुझे नंगा कर दिया,
रिपोर्ट लिखाने थाने पहुंचा,
पुलिस वाले हंसने लगे,
दिल्ली सरकार ने जेब काटी,
दिल्ली पुलिस में शिकायत,
वाह क्या बात है !!
दिल्ली में रहना अपराध हो गया,
पानी महंगा, बिजली महंगी,
तेल महंगा, गैस महंगी,
हर चीज़ पर टेक्स,
साझा धन खेल बन गए जी का जंजाल,
दुनिया की सबसे महंगी जेबकटी,
एक झटके में ११३४ करोड़,
मेरे पडोसी ने वोट दिया शीला को,
और सजा मिल रही है मुझे,
मेरे पैसे से पांच सितारा मूत्रालय,
वह खेलने आयेंगे या मूतने?
है भगवान् बना दो मुझे,
एक दिन का प्रधान मंत्री,
सारे स्टेडियम, सारे फ्लाई ओवर,
सारी सड़कें, सारे मूत्रालय,
सारे अधिकारी, सारे खिलाड़ी,
फीता काटने वाले,
जो भी सम्बंधित है साझा धन खेल से,
भर कर जहाज़ों में,
भेज दूंगा लन्दन को,
रानी अपने यहाँ करा यह खेल,
अब हम गुलाम नहीं हैं तेरे,
अब हमारी रानी अपने देश में नहीं रहती,
वह यहीं आ कर राज करती है,
और अब हमारा राष्ट्रीय खेल हाकी नहीं,
राजनीति की शतरंज है,
वह खेलना है तो आ जा,
इंगलिस्तान जीत लेंगे तुझसे.
जेब क्या कटी, ऐसा लगा,
जैसे दिन दहाड़े बाज़ार में,
किसी ने मेरी कमीज़ उतार ली,
और मुझे नंगा कर दिया,
रिपोर्ट लिखाने थाने पहुंचा,
पुलिस वाले हंसने लगे,
दिल्ली सरकार ने जेब काटी,
दिल्ली पुलिस में शिकायत,
वाह क्या बात है !!
दिल्ली में रहना अपराध हो गया,
पानी महंगा, बिजली महंगी,
तेल महंगा, गैस महंगी,
हर चीज़ पर टेक्स,
साझा धन खेल बन गए जी का जंजाल,
दुनिया की सबसे महंगी जेबकटी,
एक झटके में ११३४ करोड़,
मेरे पडोसी ने वोट दिया शीला को,
और सजा मिल रही है मुझे,
मेरे पैसे से पांच सितारा मूत्रालय,
वह खेलने आयेंगे या मूतने?
है भगवान् बना दो मुझे,
एक दिन का प्रधान मंत्री,
सारे स्टेडियम, सारे फ्लाई ओवर,
सारी सड़कें, सारे मूत्रालय,
सारे अधिकारी, सारे खिलाड़ी,
फीता काटने वाले,
जो भी सम्बंधित है साझा धन खेल से,
भर कर जहाज़ों में,
भेज दूंगा लन्दन को,
रानी अपने यहाँ करा यह खेल,
अब हम गुलाम नहीं हैं तेरे,
अब हमारी रानी अपने देश में नहीं रहती,
वह यहीं आ कर राज करती है,
और अब हमारा राष्ट्रीय खेल हाकी नहीं,
राजनीति की शतरंज है,
वह खेलना है तो आ जा,
इंगलिस्तान जीत लेंगे तुझसे.
Labels:
Budget,
commonwealth games,
delhi govt,
pick pocket
Monday, October 19, 2009
कामनवेल्थ (साझा धन) खेल स्पर्धा शुरू
साझा धन खेल स्पर्धा,
हो गई समय से पहले शुरू,
कल्मादी, हूपर, फेनेल,
जुट गए मल्ल युद्ध में,
दुसरे को नीचा दिखाने की,
खुद को ऊंचा साबित करने की,
अघोषित प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक,
कौन जीतेगा?
कोई भी जीते,
क्या फर्क पड़ता है,
खेल तो हार गए.
Friday, October 9, 2009
निद्रा देवी की कृपा से कामनवेल्थ गेम्स बच गए

आज पार्क में शर्मा जी बहुत खुश थे. लोगों के पूछने पर अपने हाथ में लिया अखवार हिलाते थे और कहते थे, 'आने दो वर्मा को, आज माफ़ी न मंगवाई तो मेरा नाम नहीं'.
किसी की कुछ समझ में नहीं आया तो मिश्रा जी बोले, 'भई आ जाने दो वर्मा जी को सब पता चल जायगा'.
कुछ देर में वर्मा जी आ गए. शर्मा जी ने अखवार उनकी तरफ बढाया और बोले' 'लो पढो इसे और कुछ शर्म बाकी है तो माफ़ी मांगो'. वर्मा जी ने खबर पढ़ी और बोले, 'क्या है यह और किस बात की माफ़ी?'
'अच्छा किस बात की माफ़ी? अरे शर्म करो, भूल गए जब में किसी लेक्चर या प्रेजेंटेशन में सोता हूँ तो मेरा मजाक उडाते हो, बॉस से चुगली लगाते हो और मुझे डांट खिलवाते हो. अब कामनवेल्थ गेम्स फेडरेशन का प्रेसिडेंट प्रेजेंटेशन में सो रहा है तो पूछ रहे हो क्या है यह और किस बात की माफ़ी?'
वर्मा जी से अखवार ले कर हम सबने खबर पढ़ी तो सारी बात समझ में आई.
मिश्रा जी बोले, 'भई वर्मा जी यह बात तो गलत है, शर्मा जी का मजाक उड़ाना, उनकी चुगली करना और बॉस से डांट खिलवाना. अरे भई लेक्चर और प्रेजेंटेशन में सोने वाले तो महान लोग होते हैं. क्या तुमने लोक सभा और विधान सभा में
मंत्रिओं को सोते नहीं देखा? शर्मा जी महान हैं तभी तो सोते हैं,'
सब ने मिश्रा जी की बात का समर्थन किया. वर्मा जी को शर्मा जी से माफ़ी मांगनी पडी.
महान शर्मा जी का सब ने तालियों से अभिनन्दन किया,
मिश्र जी ने कहा, 'अब यह सोते हुए प्रेसिडेंट खेलों की तैयारियों पर पूरा संतोष प्रकट करेंगे. यह भी खुश, भारत सरकार भी खुश, कामनवेल्थ में से अपने-अपने हिस्से की वेल्थ लेने वाले भी खुश. सोचो जरा, अगर यह सोते नहीं तो गए थे कामनवेल्थ खेल दिल्ली से'.
Friday, October 2, 2009
जनता का धन है किसका साझा धन?
वर्मा जी ने पूछा शर्मा जी से,
यह कामनवेल्थ क्या है?
अरे इतना भी नहीं जानते?
कामनवेल्थ यानी साझा धन,
वर्मा जी बुरा मान गए,
इतनी अंग्रेजी हिंदी आती है मुझे,
यह बताओ कहाँ है यह धन?
और किस किस में साझा है?
यार यह तो कभी सोचा नहीं,
हाँ अखवार भरे हैं इस बारे में,
कोई खेल होंगे २०१० में,
जिनका नाम है कामनवेल्थ गेम्स.
दोनों गए मिश्रा जी के पास,
मिश्रा जी ने समझाया,
आज़ादी से पहले,
अंग्रेजों के गुलाम देश जो कमाते थे,
वह धन साझा होकर जमा होता था,
अंग्रेज रानी की तिजोरी में,
और कहलाता था कामनवेल्थ,
इस धन के कुछ हिस्से से,
रानी खेल खिलाती थी,
जिन्हें कहते थे कामनवेल्थ गेम्स,
पर अब तो हम आजाद हैं,
बोले वर्मा जी, शर्मा जी,
क्या बाकई? बोले मिश्रा जी,
तीनों चुप हो गए.
मिश्रा जी ने चुप्पी तोडी,
गुलामी हमारा जन्मसिद्ध अधकार है,
अंग्रेज चले गए तो क्या हुआ?
अपना अधिकार छोड़ देंगे क्या?
देखा नहीं क्या?
कैसे नतमस्तक हो जाते हैं सब,
गोरी चमड़ी के सामने?
कामनवेल्थ गेम्स में जिन्दा है अभी भी गुलामी,
अब रही कामनवेल्थ की बात,
तो अब जनता का साझा धन,
बंटता है मंत्रियों में, बाबुओं में,
ठेकेदारों में, चमचों में,
हजारों करोड़ का वजट है भाई,
कई पीढिया तर जायेंगी.
चलो अब यह बहस बंद करो,
अपना कर्तव्य निभाओ,
आम आदमी धन कमाएगा,
सरकार को कर देगा,
तभी तो जेब भरेगी,
गुलामों के गुलाम नेताओं की.
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