भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.

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Thursday, March 5, 2009

मैं हूँ न !!!

राजमाता के चरणों में शत-शत नमन. 

आप क्यों चिंता करती हैं राजमाता? आपकी लोक सभा के लिए चुनावों का कार्यक्रम आपके चुनाव आयोग ने घोषित कर दिया है. चुनाव होंगे और जरूर होंगे. आप चाहती हैं, चुनाव निष्पक्ष हों, देश के अन्दर और देश के बाहर सारी दुनिया को लगे कि चुनाव निष्पक्ष हुए हैं, इसलिए चुनाव निष्पक्ष होंगे. मेरी निष्पक्ष चुनाव की परिभाषा वही है जो आपकी है - केवल वही चुनाव निष्पक्ष है जिस में राजमाता की पार्टी जीतती है. इसलिए आप कोई चिंता न करें. में हूँ न. 

मेरे खिलाफ शिकायत थी. मेरे बड़े  आयुक्त भाई ने उस पर जांच की और मुझे दोषी पाया. मुझे पद से हटाने की सिफारिश कर दी राष्ट्रपति को. शिकायत भी सही थी, जांच भी सही थी, सिफारिश भी सही थी, पर बड़े भाई यह भूल गए कि सत्य वही होता है जिसे राजमाता सत्य कहें. राष्ट्रपति ने आपके निर्देश को सत्य माना और सबको धता बता दी. अब बड़े भाई के हटते ही मैं बड़ा भाई हो जाऊँगा. उसके बाद आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है - मैं हूँ न. 

यह देश आपका है, इस देश की राष्ट्रपति आपकी हैं, इस देश के उपराष्ट्रपति आपके हैं. इस देश के प्रधान मंत्री आपके हैं. सारे  मंत्री आपके हैं. अब इस देश के चुनाव आयोग का मुखिया भी आपका है. यह सब लोग रात-दिन यही कहते रहते हैं - हम हैं न. चुनाव के मामले में भी आप कोई चिंता न करें - मैं हूँ न. 
 
मैं तो यह कहूँगा कि चुनाव की आवश्यकता ही क्या है. लोग नामांकन पत्र भरेंगे. जांच के बाद बस 'हाथ' वाले उम्मीदवार का पर्चा सही पाया जायेगा. बाकी सारे पर्चे किसी न किसी कारण से अस्वीकार कर दिए जायेंगे. सारे 'हाथ' वालों को निर्विरोध निर्वाचित कर दिया जायेगा. जिनको विरोध करना है करेंगे. सारा संसार देखेगा कि भारत में सबको विरोध करने का अधिकार है. सब यही कहेंगे कि सच्चा प्रजातंत्र है भारत. मुझे चुनाव आयोग का मुखिया बनाने में आपने भारतीय जनता और अदालत को जैसे धता बताई वैसे ही मैं भी धता बता दूंगा. आप चिंता न करें - मैं हूँ न. 

आप नाराज न हों. मैंने तो बस एक राय दी थी. ठीक है मैं समझ गया. मुझे अपनी औकात में रहना है.  आप चाहती हैं कि सब कुछ सही तरह से हो. मुझे जो गलत करना है वह भी सही तरह से हो. जहाँ सही करने से 'हाथ' को फायदा हो वहां सही करना है. यहाँ गलत करने से फायदा हो वहां गलत करना है. मतलब यह कि हर हाल में 'हाथ' को ही फायदा होना चाहिए. आप चिंता न करें ऐसा ही होगा - मैं हूँ न. 

इस पत्र को पढ़ कर जला दीजियेगा. 

आपका

मैं हूँ न. 

Sunday, January 11, 2009

मुन्नाभाई एमबीबीएस बनेंगे स्वास्थ्य मंत्री

किसी ने राम जे से पूछा, 'आपने संजय का मुकदमा लड़ा था, पर अब जब उस ने चुनाव लड़ने का सोचा तो आपने न जाने क्या-क्या कह डाला. उसके एमपी बनने को देश के लिए खतरा बता दिया'. 
'क्यों न कहूं?', राम जे बोले, 'मुक़दमे की फीस नहीं मिली अभी तक'. 

किसी ने अमर से पूछा, 'आपने कहा संजय को चुनाव में खड़ा करेंगे, अगर अदालत ने आपत्ति की तो मान्यता को खड़ा कर देंगे, क्या कोई और नहीं मिल रहा आपको?'
अमर बोले, 'यह कांग्रेस के एकाधिकार के ख़िलाफ़ हमारी जंग है. क्या कांग्रेस का दत्त परिवार पर एकाधिकार है? पहले पिताजी, फ़िर बेटी, अब नजर डाल रहे थे बेटे पर. हमने उनसे पहले , अपना दावा ठोक दिया.'

किसी ने अर्जुन से पूछा, 'जब आपने कहा था उन्हें पीएम बनाओ तो आपको डांट पड़ी थी, अब जब प्रणब ने यही कहा तो किसी न उन्हें नहीं डांटा. यह भेद-भावः क्यों?'
'अपना-अपना मुकद्दर है. लगता है प्रणब की चमचागिरी मेरी चमचागिरी से ज्यादा पसंद है उन्हें.', वह दुखी मन से बोले. 

किसी ने अमर से फ़िर पूछा, 'अगर संजय जीत गए और आपकी सरकार बन गई तो उन्हें कौन सा मंत्रालय देंगे?'
'स्वास्थ्य मंत्रालय' उन्होंने तुंरत जवाब दिया, 'आपने देखा नहीं, उसने डाक्टरी परीक्षा में टॉप किया था उस फ़िल्म में, और कितने मरीजों को ठीक किया था. संजय से अच्छा स्वास्थ्य मंत्री हो ही नहीं सकता'. 
'लेकिन वह तो ऐक्टिंग थी'. 
'अरे भाई, असल में भी तो ऐक्टिंग ही करते हैं स्वास्थ्य मंत्री'. 
'लेकिन संजय ने तो दादागिरी की थी'.
'और इन्होनें भी तो दादागिरी ही की थी एम्स के निदेशक के ख़िलाफ़'. 

किसी ने गिलानी से कहा, 'आप ने खूब खरी-खोटी सुनाई भारत और सारी दुनिया को. किस ने लिखा था यह भाषण?' 
'किसी ने नहीं. जरदारी साहब ने अपने आफिस में बुला कर सारी तोहमत मेरे ऊपर लगा दी मुंबई हमले की. मेरा दिमाग फ़िर गया. बस में बाहर आया और शुरू हो गया'. गिलानी ने खुलासा किया. 
'भारत में टीवी वाले खूब मजाक उड़ा रहे थे आपका'. 
'उडाने दो. हमने उनके इतने आदमियों को उड़ा दिया. उन्हें कम से कम मजाक तो उडाने दो', गिलानी ने अपनी पीठ ठोकते हुए कहा. 


Thursday, December 4, 2008

बेचारा पप्पू

पप्पू - सोच रहा हूँ नाम बदल लूँ. 
गप्पू - क्यों इस नाम में क्या बुराई है?
पप्पू - पहले नहीं थी, अब हो गई है. इस साले चुनाव आयोग को भी यही नाम मिला था. मैंने वोट डाला था, फ़िर भी लोग मुझे रोक कर पूछते हैं कि आपने वोट क्यों नहीं डाला?
 
पति - वधाई हो,  आज दिल्ली में मतदान है.
पत्नी - इस में वधाई की क्या बात है?
पति - अरे भई, पाँच साल में यह मौका आता है. आज के दिन ऐसा महसूस होता है कि हम भी कुछ हैं.
पत्नी - यह तुम्हें ही महसूस होता है या कोई दूसरा भी यह महसूस करता है कि तुम भी कुछ हो?
पति - पहले तो ऐसा लगता था कि दूसरे भी यह महसूस करते हैं कि हम कुछ हैं, भले वह एक दिन के लिए ही ऐसा महसूस करते हों. पर इस बार तो ऐसा कुछ हुआ ही नहीं. आँखें तरस गईं, कान तरस गए - कोई आएगा, घंटी बजायेगा, हम तने हुए दरवाजा खोलेंगे,  वह हाथ जोड़ कर और कुछ झुक कर कहेगा, 'अपना अमूल्य वोट हमें ही दीजियेगा'. पर इस बार तो यह सपना सपना ही रह गया. कोई नहीं आया इस बार. 
पत्नी - हाँ यह बात तो है. मतदाता का इतना अपमान तो कभी नहीं हुआ. मत दो किसी को वोट इस बार. 
पति - वोट नहीं दूँगा तो चुनाव आयोग मुझे पप्पू कहेगा. 
पत्नी - हाँ यह बात भी है. मतदाता तो बेचारा हर तरफ़ से फंस गया. वोट दें तो दें किसे, कोई भी तो वोट के लायक नहीं  है. वोट न दो तो लोग पप्पू कहेंगे. 
पति - इस से तो अंग्रेजों की गुलामी अच्छी थी. गुलाम थे गुलाम कहलाते थ. अब कहने को तो आजद हो गए हैं, पर वोट तक डालने की तो आजादी नहीं है. यह सीट आरक्षित है, यानी अब कुछ लोगों में से ही अपना प्रतिनिधि चुन सकते हैं. रमाकांत पंडित हैं, पूरी तरह योग्य हैं, पर उन्हें नहीं चुन सकते क्योंकि वह आरक्षित वर्ग के नहीं हैं.
पत्नी - हाँ यह बात तो है. आजादी भी कुछ लोगों के लिए आरक्षित हो गई है. बाकी तो सब अब भी गुलाम हैं. 
   

Monday, October 27, 2008

नंगापन

चुनाव का मौसम आया,
यानी नंगा होने का मौसम आया,
देखना, कैसे-कैसे फैशनबाज,
नंगे होते हैं और नंगा करते हैं?
नफरत का नंगा नाच करेंगे, 
ईमान, अगर बचा है,
तो उसे बेचेंगे, 
पहले टिकट खरीदेंगे,
फ़िर वोट खरीदेंगे. 

Sunday, October 26, 2008

चुनाव

उन्होंने कहा,
मैं चुनाव में खड़ा हूँ,
मैंने कहा ग़लत,
आप तो मेरे दरवाजे पर खड़े हैं.

उन्होंने कहा,
मैं चुनाव लड़ रहा हूँ,
मैंने कहा ग़लत,
चुनाव कोई लड़ाई नहीं है.

उन्होंने कहा,
मुझे वोट दीजियेगा,
मैंने कहा,
पहले आप तय तो कर लीजिये,
आप कर क्या रहे हैं? 
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