एक आम आदमी स्कूटर चला रहा था. सड़क पर लगे स्टाप साइन को देख कर उस ने स्कूटर को धीमा कर लिया पर रोका नहीं. यह देख कर दिल्ली ट्रेफिक पुलिसमेन ने उस से उसका ड्राइविंग लाइसेंस माँगा.
आम आदमी ने कहा, 'क्या फर्क पड़ता है, स्कूटर धीमी करो या रोक लो'.
'अभी बताता हूँ', कह कर पुलिसमेन ने उसे पीटना शुरू कर दिया, 'बोलो धीमा करुँ या रोक दूँ?'
आम आदमी रोते हुए बोला, 'रोक दो'.
'अब यह ड्राविंग लाइसेंस से नहीं रुकेगा, तुम्हारी जेब में हाथ डालना पड़ेगा'.पुलिसमेन बोला.
जेब कटवा कर आम आदमी रोता हुआ चला गया.
इतने में एक खास आदमी कार चलाता हुआ आया. उस ने भी कार रोकी नहीं बस धीमी की. पुलिसमेन ने उस से भी ड्राइविंग लाइसेंस माँगा. खास आदमी ने कहा लाइसेंस नहीं है. कार का रजिस्ट्रेशन मांगने पर भी खास आदमी ने कहा नहीं है. पुलिसमेन उसे अफसर के पास ले गया और सारी बात बताई. अफसर के पूछने पर खास आदमी ने कहा कि लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन दोनों पुलिसमेन ने ले लिए हैं और अब पैसे मांग रहा है. फ़िर खास आदमी अपने मोबाइल पर एक नंबर मिलाने लगा.
इस बार पुलिसमेन रोने लगा, 'नहीं सर मैंने कोई लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नहीं लिया',
अफसर बोला, 'चलो साहब से माफ़ी मांगो', फ़िर खास आदमी से कहा, 'साहब प्लीज इसे माफ़ कर दीजिये',
'चलो माफ़ किया, आइन्दा ख्याल रखना', खास आदमी ने कहा और चला गया.
पुलिसमेन ने शान्ति की साँस ली. अफसर ने उस के एक चांटा लगाया, 'साले दिखाई नहीं देता, खास आदमी से लाइसेंस मांगता है. मरेगा ख़ुद भी और मुझे भी मरवाएगा'.