भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.

Friday, August 5, 2011

मनमोहन का सरकारी लोकपाल


कल से शर्माजी चुप हैं,
कोई शिकायत नहीं कर रहे,
वर्माजी से रहा नहीं गया,
क्या हुआ शर्माजी?
पूरा दिन पूरी रात बीत गयी,
किसी से कोई शिकायत नहीं,
शर्माजी ने गहरी सांस ली,
आदत डाल रहा हूँ,
शिकायत न करने की,
जेल और जुर्माना,
दोनों हो सकते हैं,
सरकारी लोकपाल आ रहा है,
शिकायत करने वालों के खिलाफ. 

Sunday, July 31, 2011

लायक बेटा !!! ???

माँ मैं लायक हूँ न,
किस ने कहा बेटा?
पिग्गी अंकल ने,
किस के लिए बेटा?
पीएम बनने के लिए,
क्या मन्नू अंकल लायक हैं?
वह तो नालायक हैं माँ,
तुम ही तो कहती हो माँ,
परेशान मत हो बेटा,
पर वह हँसते हैं माँ,
कौन बेटा?
भारत के आम आदमी माँ,
वह पिग्गी पर हँसते हैं बेटा,
उन पर क्यों माँ?
उस की बेबकूफी पर बेटा,
तुम्हें लायक कहता है न.

Wednesday, February 9, 2011

एहसान फरामोश आम आदमी

बेशर्म आम आदमी,
हर समय शिकायत करता है,
सरकार ने यह नहीं किया,
सरकार ने वह नहीं किया,
बेबकूफ यह भी नहीं जानता,
सरकार आम आदमी से बनती है,
आम आदमी से चलती नहीं,
सरकार बनाने की कीमत दी थी तुझे,
दारू, मुर्गा, कम्बल और ढेर आश्वासन,
साला सब भूल गया,
एहसान फरामोश कहीं का,
कितनी दरियादिल है सरकार,
हर पांच साल बाद आती है,
और बांटती है दारू, मुर्गा, कम्बल,
पुराने और नए-नए आश्वासन,
पर बेशर्म आम आदमी,
करता रहता है हर समय शिकायत.

विदेशी बेंक, काला धन और सरकार

एक विदेशी बेंक ने पूछा,
क्यों जानना चाहती है सरकार?
भारतीय खाताधारियों के नाम,
भारत सरकार ने बताया,
देश का धन चुराया है उन्होंने,
अदालत कहती है धन वापस लाओ,
बेंक मुस्कुराया और पूछा,
क्या सरकार भी यही चाहती है?
सरकार शर्मा गई,
पर दूसरे छण गरमा गई,
अदालत सीमा लांघ रही है,
हर काम में टांग अड़ा रही है,
अम्मा को यह अच्छा नहीं लगता,
खाताधारियों के नाम बताइये,
बैसे अदालत की तो ऐसी-तैसी,
उन्हें तो भैय्या अपना हिस्सा चाहिए.

Monday, January 17, 2011

अम्मा से पंगा !!!

मंत्री ने दी कैग को गाली,
कहा उसे गुणा-भाग करना नहीं आता,
अम्मा को सब पता है,
काला-धन खेलों में कितना धन काला हुआ,
कैग की फिगर गलत है,
कलमाड़ी से मिल गया लगता है,
जो कम फिगर बता रहा है,
अम्मा से लेगा पंगा,
तो हो जाएगा नंगा,
सही फिगर बताएगा,
तो तू भी कुछ पा जाएगा.

Saturday, December 25, 2010

पढ़िए, शायद आप को हंसी आ जाय

लड़की का पिता - विवाह बराबर वालों में हो तभी सफल होता है.
उम्मीदवार - आप सही कहते हैं. मेरा और आपकी बेटी का विवाह भी सफल होगा.
लड़की का पिता - मगर तुम्हारी तो कोई हैसियत ही नहीं है.
उम्मीदवार - अभी कुछ नहीं है पर विवाह के बाद तो आप के बराबर हो जायेगी.

Ruling Party and Opposition Party have same policy.
What is that?
Both love power.

नौकर - मालकिन मैं आप के यहाँ काम नहीं कर सकता.
मालकिन -क्यों?
नौकर - आप मुझे ऐसे डांटती हैं जैसे मैं आपका पति हूँ.

It was Raju's first day in school.
When he returned home, his mother asked, 'what did you learn today?'
'Not much', Raju replied, 'tomorrow also I will have go to school'.

नेता - मैं कल से दहेज़ के खिलाफ अभियान चला रहा हूँ.
पत्रकार - आज से ही क्यों नहीं?
नेता - आज मेरे बेटे की शादी है.

Raju returned from school.
He was both happy and sad.
Happy, as he was promoted to class 2.
Sad, as his teacher was not promoted.

A minister while going to Parliament asked his driver, ‘Can you drive the car with your eyes closed?’
Driver replied in the negative.
Minister taunted the driver, ‘You can’t even drive the car with eyes closed, and we are driving the entire country with closed eyes.’
Driver got annoyed and closed his eyes. A big bang, people came running and took out the driver. They thanked him, ‘You have done a great service to the nation. May God rest the soul of minister in peace’.

Wednesday, September 22, 2010

एक नया रिकार्ड

उन्होंने कहा,
हम इन काला धन खेलों में,
एक नया रिकार्ड बनायेंगे,
विदेशी खिलाडी या तो नहीं आयेंगे,
या आकर बीमार पड़ जायेंगे,
सारे पदक सोना, चाँदी, तांबा,
हमारे खिलाड़ी ले जायेंगे.

Thursday, August 5, 2010

साझा (काला) धन खेल

साझा धन खेल,
हो गए काला धन खेल,
गोरे तो रहे गोरे,
काले हो गए और काले,
जेब काटी सरकार ने,
दलितों को भी नहीं छोड़ा,
उनका पैसा भी हड़प, हजम,
खोद डाली सारी दिल्ली,
नया बनाने के नाम पर,
कोई शर्म नहीं, कोई शर्मसार नहीं,
राष्ट्रीय शर्म का यह उत्सव,
मना रहे है सब गर्व से.

Monday, July 19, 2010

अघोषित राष्ट्रीय मानक

भारत की,
राष्ट्रीय मानक संस्था,
भारतीय मानक ब्यूरो,
बनाती है राष्ट्रीय मानक,
छपते हैं, गजट होते हैं,
इस्तेमाल जरा कम होते हैं,
एन बनाया अघोषित मानक,
न छपा, न गजट हुआ,
पर जम कर इस्तेमाल हुआ,
मानकः पथ भ्रष्टकः
कैसे बनाएं प्रभावहीन,
सूचना के अधिकार को?
कैसे बनाएं प्रभावशाली,
चमचागिरी के हथियार को?
काम करना हराम है,
भ्रष्टाचार हलाल है.

संगठित भ्रष्टाचार

आज के अखवार में,
निकला है एक विज्ञापन,
संगठित भ्रष्टाचार में शामिल हों,
जम कर रिश्वत खाएं,
विदेश यात्रा पर जाएँ,
पसंदीदा जगह पर पोस्टिंग,
समय से पहले प्रमोशन,
अच्छे अफसरों में गिनती,
पड़ोसी आदर से नाम लें,
रिश्तेदार नजरें झुका कर बात करें,
कोई डर नहीं, कोई खतरा नहीं,
सीवीसी, पुलिस, अदालत, सरकार,
सब मदद करने को तैयार,
सावधान,
अकेला भ्रष्टाचारी मार खाता है,
संगठित भ्रष्टाचारी पूजा जाता है.

मिडिल क्लास की यंत्रणा

गर्मी इस बार कुछ ज्यादा ही पड़ गई,
वर्मा जी भी हो गए परेशान,
कुछ पसीने से,
कुछ बीबी-बच्चों के तानों से,
बेंक ने लोन दे दिया,
घर में एसी लगवा लिया,
खूब ठंडी हवा खाई,
कोलोनी में बिना एसी वालों को देखते,
तब मन ही मन कहते,
'उफ़ यह मिडिल क्लास वाले',
फिर आया विजली का बिल,
एसी की ठंडी हवा में पसीने आ गए,
लोन की किश्त भरें,
या विजली का बिल दें?
डराबने सपने आने लगे,
कभी विजली कट जाए,
कभी बेंक के गुंडे आ जाएँ,
खुद ही एसी वापस कर आये,
पसीना वर्दाश्त कर लेंगे,
लोन पर एसी लेकर,
मिडिल से अपर क्लास नहीं हो जाता कोई.

Thursday, June 24, 2010

जनता से पंगा !!!

पटना में चाय की एक दुकान,
बतिया रहे थे कुछ बिहारी,
यह नितीश बौरा गए हैं क्या?
गुजरात की जनता ने मदद भेजी,
यह ससुर लौटा दिए उस को,
मरे गरीब बाढ़ में,
वह गए घर, खेत, खलिहान,
इनका क्या बिगड़ा?
जनता की जनता को मदद,
यह कौन हैं लौटाने वाले?
दिमाग में चढ़ गई है सत्ता,
भूल गए हैं ससुर,
जनता ने बिठाया था कुर्सी पर,,
जनता ही उतार देगी,
कोई समझाए इनको,
न लें जनता से पंगा.

Wednesday, June 23, 2010

हाथ का सही इस्तेमाल

एक कहावत सुनी थी,
हाथ मिलाने से बन जाते हैं दुश्मन मित्र,
यहाँ हाथ मिलाते हुए विज्ञापन क्या छपा,
गले की जंजीर बन गया,
रात भूखी रह कर काटनी पड़ी,
नितीश ने सामने से खाने की थाली छीन ली,
और एक कांग्रेस है,
हाथ दिखाती है और सत्ता में आ जाती है,
हमने कहावत बदल दी,
हाथ मिलाओगे मुश्किल में पड़ जाओगे,
हाथ दिखाओगे सत्ता में आ जाओगे.

दिल्ली का सच्चा सच

एक दिन अखबार में खबर आई,
एक सिरफिरे ने पीआइएल लगा दी,
कामनवेल्थ साईट्स पर,
हो रहा है अमानवीय व्यवहार,
मजदूरों के साथ,
हाई कोर्ट ने कमेटी बना दी,
कमेटी ने सच्चाई बता दी,
जानवरों से बदतर हालात हैं मजदूरों के,
न्यूनतम वेतन नहीं मिलता,
ओवरटाइम का पैसा नहीं मिलता,
सरकार सक्रिय हो गई,
खबर अखवार से गायब हो गई.

Thursday, June 17, 2010

दिल्ली एक विश्व स्तर का शहर है - इसे हास्य कहूं या व्यंग ???

केंद्र में कांग्रेस सरकार और दिल्ली की मुख्य मंत्री यह दावा करती हैं कि दिल्ली एक विश्व स्तर का शहर है - यह हास्य है. दिल्ली की जनता ने शीला जी को तीसरी बार मुख्य मंत्री बनाया - यह व्यंग है. मैंने उन्हें वोट नहीं दिया. इस का एक कारण था कि मैंने डीडीए डिस्ट्रिक्ट पार्क पश्चिम पुरी को देखा है. अगर आप इस पार्क को देख लेते तब शायद आप भी शीला जी को तीसरी बार वोट नहीं देते. अगर आपने अभी तक इस पार्क को नहीं देखा है तब मैं आपको इस पार्क में आने का निमंत्रण देता हूँ. जब तक इस के लिए समय निकालें, तब तक इस लिंक पर क्लिक करें और यह स्लाइड शो देखें.

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