कल फिर मेरी जेब कट गई,
जेब क्या कटी, ऐसा लगा,
जैसे दिन दहाड़े बाज़ार में,
किसी ने मेरी कमीज़ उतार ली,
और मुझे नंगा कर दिया,
रिपोर्ट लिखाने थाने पहुंचा,
पुलिस वाले हंसने लगे,
दिल्ली सरकार ने जेब काटी,
दिल्ली पुलिस में शिकायत,
वाह क्या बात है !!
दिल्ली में रहना अपराध हो गया,
पानी महंगा, बिजली महंगी,
तेल महंगा, गैस महंगी,
हर चीज़ पर टेक्स,
साझा धन खेल बन गए जी का जंजाल,
दुनिया की सबसे महंगी जेबकटी,
एक झटके में ११३४ करोड़,
मेरे पडोसी ने वोट दिया शीला को,
और सजा मिल रही है मुझे,
मेरे पैसे से पांच सितारा मूत्रालय,
वह खेलने आयेंगे या मूतने?
है भगवान् बना दो मुझे,
एक दिन का प्रधान मंत्री,
सारे स्टेडियम, सारे फ्लाई ओवर,
सारी सड़कें, सारे मूत्रालय,
सारे अधिकारी, सारे खिलाड़ी,
फीता काटने वाले,
जो भी सम्बंधित है साझा धन खेल से,
भर कर जहाज़ों में,
भेज दूंगा लन्दन को,
रानी अपने यहाँ करा यह खेल,
अब हम गुलाम नहीं हैं तेरे,
अब हमारी रानी अपने देश में नहीं रहती,
वह यहीं आ कर राज करती है,
और अब हमारा राष्ट्रीय खेल हाकी नहीं,
राजनीति की शतरंज है,
वह खेलना है तो आ जा,
इंगलिस्तान जीत लेंगे तुझसे.
हम आज ऐसे समाज में रहते हैं जो बहुत तेजी से बदल रहा है और हम सबके लिए नए तनावों की स्रष्टि कर रहा है. पर साथ ही साथ समाज में घट रही बहुत सी घटनाएं हमारे चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं. हमारे तनाव, भले ही कुछ समय के लिए, कम हो जाते हैं. हर घटना का एक हास्य-व्यंग का पहलू भी होता है. इस ब्लाग में हम उसी पहलू को उजागर करने का प्रयत्न करेंगे.
भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.
Tuesday, March 23, 2010
Wednesday, March 17, 2010
पति का सपना और सरकार
पति का सपना पूरा करना है उन्हें,
नारी आरक्षण का बिल पास कराना है,
सरकार को आदेश मिला,
राज्य सभा में बिल आया,
पुराने दुश्मनों की मदद से पास भी हो गया,
पर एक नई चिंता आड़े आ गई,
सरकार गिर गई तो !!!
मुलायम कठोर हो गए,
लल्लू ने लाठी उठा ली,
अल्पसंख्यकों ने त्योरी चढ़ा ली,
नया आदेश आया,
धीरे चलो.
नारी आरक्षण का बिल पास कराना है,
सरकार को आदेश मिला,
राज्य सभा में बिल आया,
पुराने दुश्मनों की मदद से पास भी हो गया,
पर एक नई चिंता आड़े आ गई,
सरकार गिर गई तो !!!
मुलायम कठोर हो गए,
लल्लू ने लाठी उठा ली,
अल्पसंख्यकों ने त्योरी चढ़ा ली,
नया आदेश आया,
धीरे चलो.
Monday, February 22, 2010
वकालत खारिज, राजनीति शुरू
कपिल सिब्बल पहले वकील थे,
अब बन गए हैं राजनीतिबाज,
भूल गए हैं कानून,
प्राइवेट स्कूलों की फीस पर,
सरकार नहीं कर सकती रोकथाम,
पर अंधाधुंध फायदा नहीं,
क्या बात है जनाब आपकी,
चोर से कहें चोरी कर,
पर सब कुछ मत चुरा लेना.
जेब कतरे से कहें काट ले जेब,
पर कुछ नोट छोड़ देना.
अब बन गए हैं राजनीतिबाज,
भूल गए हैं कानून,
प्राइवेट स्कूलों की फीस पर,
सरकार नहीं कर सकती रोकथाम,
पर अंधाधुंध फायदा नहीं,
क्या बात है जनाब आपकी,
चोर से कहें चोरी कर,
पर सब कुछ मत चुरा लेना.
जेब कतरे से कहें काट ले जेब,
पर कुछ नोट छोड़ देना.
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Sunday, February 7, 2010
तरक्की
मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की की है.
कैसे?
पहले जब लोग मरते थे तब पता ही नहीं चलता था कि किस बीमारी से मरे.
और अब?
अब डाक्टर कुछ कुछ अनुमान लगा लेते हैं कि किस बीमारी से मरे.
कैसे?
पहले जब लोग मरते थे तब पता ही नहीं चलता था कि किस बीमारी से मरे.
और अब?
अब डाक्टर कुछ कुछ अनुमान लगा लेते हैं कि किस बीमारी से मरे.
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Monday, February 1, 2010
बापू जीवित हैं
तीस जनवरी १९४८,
बापू का महाप्रयाण,
तीस जनवरी २०१०,
दिल्ली सरकार का विज्ञापन,
'बापू जीवित हैं'.
कहाँ रहते हैं वह?
मैं मिलना चाहता हूँ उनसे,
पूछना चाहता हूँ,
आप जीवित हैं अगर,
तब क्यों नहीं आते नजर?
सपने में बापू नजर आये,
बोले मैं जीवित होता हूँ,
हर वर्ष ऐसे विज्ञापन में,
फिर मर जाता हूँ,
अगले वर्ष जीवित होने के लिए,
ऐसे ही किसी विज्ञापन में,
और फिर मर जाता हूँ एक वर्ष के लिए.
बापू का महाप्रयाण,
तीस जनवरी २०१०,
दिल्ली सरकार का विज्ञापन,
'बापू जीवित हैं'.
कहाँ रहते हैं वह?
मैं मिलना चाहता हूँ उनसे,
पूछना चाहता हूँ,
आप जीवित हैं अगर,
तब क्यों नहीं आते नजर?
सपने में बापू नजर आये,
बोले मैं जीवित होता हूँ,
हर वर्ष ऐसे विज्ञापन में,
फिर मर जाता हूँ,
अगले वर्ष जीवित होने के लिए,
ऐसे ही किसी विज्ञापन में,
और फिर मर जाता हूँ एक वर्ष के लिए.
Wednesday, January 27, 2010
दूसरों को नसीहत, खुद मादाम फजीहत
उन्होंने कहा कानून बनाओ,
अपराधी चुनाव न लड़ सकें,
कुछ ऐसा कर दिखाओ.
उन्होंने आज यह कहा,
मैं न जाने कब से कह रहा हूँ,
पर मैं एक आम आदमी हूँ,
वह उस पार्टी की मालकिन हैं,
जिसकी सरकार है इस देश में,
मेरी किसी ने न सुनी,
उनकी सब सुन रहे है,
पर यह कोई नहीं सोचता,
कि वह कानून बना सकती हैं,
पर बनाती नहीं बस बात करती हैं,
कम से कम यह तो कर सकती हैं,
अपनी पार्टी में सभी अपराधियों को,
पार्टी से निकाल सकती हैं,
पर वह ऐसा करेंगी नहीं,
वह आम आदमी नहीं हैं,
वह एक राजनीतिबाज हैं,
बचपन में पढी थी एक कहावत,
दूसरों को नसीहत,
खुद मादाम फजीहत.
अपराधी चुनाव न लड़ सकें,
कुछ ऐसा कर दिखाओ.
उन्होंने आज यह कहा,
मैं न जाने कब से कह रहा हूँ,
पर मैं एक आम आदमी हूँ,
वह उस पार्टी की मालकिन हैं,
जिसकी सरकार है इस देश में,
मेरी किसी ने न सुनी,
उनकी सब सुन रहे है,
पर यह कोई नहीं सोचता,
कि वह कानून बना सकती हैं,
पर बनाती नहीं बस बात करती हैं,
कम से कम यह तो कर सकती हैं,
अपनी पार्टी में सभी अपराधियों को,
पार्टी से निकाल सकती हैं,
पर वह ऐसा करेंगी नहीं,
वह आम आदमी नहीं हैं,
वह एक राजनीतिबाज हैं,
बचपन में पढी थी एक कहावत,
दूसरों को नसीहत,
खुद मादाम फजीहत.
Sunday, January 17, 2010
रामपुर का डाक्टर
उत्तर प्रदेश में रामपुर,
रामपुर में एक डाक्टर,
डाक्टर का एक मरीज,
मरीज का रक्त चाप गिर गया,
सुगर लेबल भी कम हो गया,
सब लोग घबड़ाए,
पर डाक्टर जी मुस्कुराए,
मरीज को ले चलो बरेली,
करूंगा में एंजियोग्राफी,
दस हजार का खर्चा आएगा,
सब ठीक हो जाएगा.
मरीज अड़ गया दिल्ली जाऊँगा,
जिस डाक्टर ने बाई पास किया था,
उसी से एंजियोग्राफी करवाऊंगा,
सुन कर डाक्टर उदास हो गए,
बोले में उन्हें चिट्ठी लिख देता हूँ,
मन में सोचा दस हजार नहीं,
कुछ कमीशन ही सही,
कडकडाती सर्दी, घने कोहरे में,
सात घंटे के सफ़र के बाद,
मरीज दिल्ली पहुंचा,
पहले तो डाक्टर ने मना किया,
कोई जरूरत नहीं वह बोला,
पर मरीज घबड़ा रहा था सो मान गया,
टेस्ट हुआ, सब ठीक निकला,
मरीज की जान में जान आई,
पर बीस हजार के नीचे आ गया,
वाह रे डाक्टर, वाह री डाक्टरी,
सेवा का धंधा,
बन गया पैसे कमाने की मशीन.
रामपुर में एक डाक्टर,
डाक्टर का एक मरीज,
मरीज का रक्त चाप गिर गया,
सुगर लेबल भी कम हो गया,
सब लोग घबड़ाए,
पर डाक्टर जी मुस्कुराए,
मरीज को ले चलो बरेली,
करूंगा में एंजियोग्राफी,
दस हजार का खर्चा आएगा,
सब ठीक हो जाएगा.
मरीज अड़ गया दिल्ली जाऊँगा,
जिस डाक्टर ने बाई पास किया था,
उसी से एंजियोग्राफी करवाऊंगा,
सुन कर डाक्टर उदास हो गए,
बोले में उन्हें चिट्ठी लिख देता हूँ,
मन में सोचा दस हजार नहीं,
कुछ कमीशन ही सही,
कडकडाती सर्दी, घने कोहरे में,
सात घंटे के सफ़र के बाद,
मरीज दिल्ली पहुंचा,
पहले तो डाक्टर ने मना किया,
कोई जरूरत नहीं वह बोला,
पर मरीज घबड़ा रहा था सो मान गया,
टेस्ट हुआ, सब ठीक निकला,
मरीज की जान में जान आई,
पर बीस हजार के नीचे आ गया,
वाह रे डाक्टर, वाह री डाक्टरी,
सेवा का धंधा,
बन गया पैसे कमाने की मशीन.
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Friday, January 15, 2010
तीन सवाल ???
पडोसी देश ने,
हड़प ली जमीन हमारी,
इंच-इंच करके,
पर सरकार सोती रही,
कुछ न कर पाई,
न ही कुछ करना चाहा,
क्या देश सुरक्षित है,
ऐसी सरकार के हाथों में?
एक लेखक की किताब,
खूब बिकी, खूब बिकी,
परम्परा के अनुसार,
उन्होंने एक लेख में लिखा,
कश्मीर दे दो पाकिस्तान को,
किसी ने कुछ नहीं कहा,
न कोई फतवा,
न ही कोई भर्त्सना,
क्या देश सुरक्षित है,
ऐसे लेख्कों के हाथों में?
मैं दिल्ली में रहता हूँ,
बड़ा अजीब लगता है,
प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री,
अक्सर बयान देते हैं,
दिल्ली को बनायेंगे,
सबसे खूबसूरत शहर,
मेरी कालोनी के पार्क में,
घुमते हैं कुत्ते और सुवर,
क्या मेरा शहर सुरक्षित है,
ऐसे नेताओं के हाथों में?
हड़प ली जमीन हमारी,
इंच-इंच करके,
पर सरकार सोती रही,
कुछ न कर पाई,
न ही कुछ करना चाहा,
क्या देश सुरक्षित है,
ऐसी सरकार के हाथों में?
एक लेखक की किताब,
खूब बिकी, खूब बिकी,
परम्परा के अनुसार,
उन्होंने एक लेख में लिखा,
कश्मीर दे दो पाकिस्तान को,
किसी ने कुछ नहीं कहा,
न कोई फतवा,
न ही कोई भर्त्सना,
क्या देश सुरक्षित है,
ऐसे लेख्कों के हाथों में?
मैं दिल्ली में रहता हूँ,
बड़ा अजीब लगता है,
प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री,
अक्सर बयान देते हैं,
दिल्ली को बनायेंगे,
सबसे खूबसूरत शहर,
मेरी कालोनी के पार्क में,
घुमते हैं कुत्ते और सुवर,
क्या मेरा शहर सुरक्षित है,
ऐसे नेताओं के हाथों में?
Friday, January 8, 2010
ममता दी की झटका गाड़ी
ममता दी की झटका गाड़ी,
शताब्दी एक्सप्रेस उसका नाम,
दिल्ली कालका के बीच चलती,
हर रोज सुबह और शाम.
पहला झटका दिया सुबह जब,
प्लेटफार्म से निकली बाहर,
सारे झटके गिन नहीं पाया,
उतर गया चंडीगढ़ जाकर.
सुपर फास्ट कहलाती है वह,
पर चलती कछुए की चाल,
कभी तेज चलते नहीं देखा,
मर्जी जहाँ वहीं रुक जाती.
रुकती है तो झटका देती,
चलती है तो झटका देती,
चलते-चलते झटका देती,
रुलते-रुकते झटका देती.
लालू जी की झटका गाड़ी,
अब है ममता दी की गाड़ी,
लालू बदल गए ममता में,
पर नहीं बदले झटके इसके.
ममता दी की झटका गाड़ी,
ममता दी की झटका गाड़ी.
शताब्दी एक्सप्रेस उसका नाम,
दिल्ली कालका के बीच चलती,
हर रोज सुबह और शाम.
पहला झटका दिया सुबह जब,
प्लेटफार्म से निकली बाहर,
सारे झटके गिन नहीं पाया,
उतर गया चंडीगढ़ जाकर.
सुपर फास्ट कहलाती है वह,
पर चलती कछुए की चाल,
कभी तेज चलते नहीं देखा,
मर्जी जहाँ वहीं रुक जाती.
रुकती है तो झटका देती,
चलती है तो झटका देती,
चलते-चलते झटका देती,
रुलते-रुकते झटका देती.
लालू जी की झटका गाड़ी,
अब है ममता दी की गाड़ी,
लालू बदल गए ममता में,
पर नहीं बदले झटके इसके.
ममता दी की झटका गाड़ी,
ममता दी की झटका गाड़ी.
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Tuesday, December 29, 2009
वह सीएम् की कुर्सी पर ऊंघ रही हैं
प्रेस पार्टी ख़बरें सूंघ रही थी,
मुख्य मंत्री दफ्तर में ऊंघ रही थी,
जनता ने तीसरी बार जिताया,
कारण आज तक समझ नहीं आया,
खुद मैंने खुद को वोट नहीं डाला,
पर जनता मुझे ही वोट डाल गई,
क्या जनता बेबकूफ है?
या कोई साजिश कर रही है?
घर और बाहर कोई सुरक्षित नहीं,
चोर और पुलिस में कोई अंतर नहीं,
सड़कों में गड्ढे या गड्ढों में सड़कें?
मौत बांटती ब्लू लाइन बसें,
पानी तो बिजली नहीं,
बिजली तो पानी नहीं,
अक्सर दोनों ही नहीं,
कुछ भी तो सही नहीं,
बस एक ही बात सही है,
वह सीएम् की कुर्सी पर ऊंघ रही हैं,
प्रेस पार्टी ख़बरें सूंघ रही है.
मुख्य मंत्री दफ्तर में ऊंघ रही थी,
जनता ने तीसरी बार जिताया,
कारण आज तक समझ नहीं आया,
खुद मैंने खुद को वोट नहीं डाला,
पर जनता मुझे ही वोट डाल गई,
क्या जनता बेबकूफ है?
या कोई साजिश कर रही है?
घर और बाहर कोई सुरक्षित नहीं,
चोर और पुलिस में कोई अंतर नहीं,
सड़कों में गड्ढे या गड्ढों में सड़कें?
मौत बांटती ब्लू लाइन बसें,
पानी तो बिजली नहीं,
बिजली तो पानी नहीं,
अक्सर दोनों ही नहीं,
कुछ भी तो सही नहीं,
बस एक ही बात सही है,
वह सीएम् की कुर्सी पर ऊंघ रही हैं,
प्रेस पार्टी ख़बरें सूंघ रही है.
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Thursday, December 17, 2009
चोर और मंत्री
माननीय धनिया राम,
इस बार मंत्री बन ही गए,
मीडिया वाले उन के घर आये,
उन का इंटरव्यू लिया,
अंत में एक सवाल पूछा,
किस का हाथ है?
आपकी इस सफलता के पीछे,
धनिया जी मुस्कुराए,
अपनी पत्नी की और इशारा किया,
सही है सब ने कहा,
हर सफल आदमी के पीछे,
होती है एक औरत.
केमरा घूम गया,
श्रीमती धनिया राम की तरफ,
वह मुस्कुराई और बोली,
धनिया जी एक चोर थे,
अक्सर पकडे जाते,
जम कर ठुकाई होती,
मेरे मन में एक ख़याल आया,
मैंने धनिया जी को समझाया,
चुनाव क्यों नहीं लड़ते,
अगर जीत गए और मंत्री बन गए,
तो रोज चोरी करना देश के धन की,
जो पुलिसवाले आज ठोकते हैं,
तब सलाम करेंगे,
आज दस नम्बरी कहलाते हो,
तब माननीय कहलाओगे,
इन्होनें मेरी बात मान मान ली,
आज पुलिस विभाग के मंत्री हैं,
पुलिस और चोर,
दोनों भेंट चढाते हैं,
मांननीय धनिया राम जी
सारे देश में पूजे जाते हैं,
पहले मात्र चोर थे,
अब चोर मंत्री हैं.
इस बार मंत्री बन ही गए,
मीडिया वाले उन के घर आये,
उन का इंटरव्यू लिया,
अंत में एक सवाल पूछा,
किस का हाथ है?
आपकी इस सफलता के पीछे,
धनिया जी मुस्कुराए,
अपनी पत्नी की और इशारा किया,
सही है सब ने कहा,
हर सफल आदमी के पीछे,
होती है एक औरत.
केमरा घूम गया,
श्रीमती धनिया राम की तरफ,
वह मुस्कुराई और बोली,
धनिया जी एक चोर थे,
अक्सर पकडे जाते,
जम कर ठुकाई होती,
मेरे मन में एक ख़याल आया,
मैंने धनिया जी को समझाया,
चुनाव क्यों नहीं लड़ते,
अगर जीत गए और मंत्री बन गए,
तो रोज चोरी करना देश के धन की,
जो पुलिसवाले आज ठोकते हैं,
तब सलाम करेंगे,
आज दस नम्बरी कहलाते हो,
तब माननीय कहलाओगे,
इन्होनें मेरी बात मान मान ली,
आज पुलिस विभाग के मंत्री हैं,
पुलिस और चोर,
दोनों भेंट चढाते हैं,
मांननीय धनिया राम जी
सारे देश में पूजे जाते हैं,
पहले मात्र चोर थे,
अब चोर मंत्री हैं.
Thursday, December 10, 2009
नया प्रदेश और दहेज़
सुना है नेताजी अनशन पर बैठ गए हैं,
हाँ आपने सही सुना है,
पर क्यों यह नहीं पता चला,
अरे सबको पता है, आपको नहीं,
एक नया प्रदेश बनाओ,
यह मांग है उनकी,
नया प्रदेश, पर कहाँ, किस नाम से?
कहीं भी, किसी भी नाम से,
बस उन्हें नया प्रदेश चाहिए,
पर क्यों, कुछ तो कारण होगा,
उनके होने वाले दामाद की जिद है,
शादी में सीएम् की कुर्सी चाहिए,
और कुर्सी कोई खाली है नहीं,
नया प्रदेश बनेगा,
नई कुर्सी बनेगी,
उस पर दामाद बैठेगा.
हाँ आपने सही सुना है,
पर क्यों यह नहीं पता चला,
अरे सबको पता है, आपको नहीं,
एक नया प्रदेश बनाओ,
यह मांग है उनकी,
नया प्रदेश, पर कहाँ, किस नाम से?
कहीं भी, किसी भी नाम से,
बस उन्हें नया प्रदेश चाहिए,
पर क्यों, कुछ तो कारण होगा,
उनके होने वाले दामाद की जिद है,
शादी में सीएम् की कुर्सी चाहिए,
और कुर्सी कोई खाली है नहीं,
नया प्रदेश बनेगा,
नई कुर्सी बनेगी,
उस पर दामाद बैठेगा.
Monday, December 7, 2009
प्रेम का नया दुश्मन
एक सुवर को मुर्गी से प्रेम हो गया,
मुर्गी भी सुवर को प्रेम करने लगी,
पर यह प्रेम पसंद नहीं आया,
दोनों के घरवालों को,
सुवर और मुर्गी का प्रेम,
न देखा कभी न सुना,
समझाया फिर धमकाया,
पर प्रेम अँधा होता है,
दोनों नहीं माने,
घर छोड़कर भाग गए,
रहने लगे लिव-इन रिलेशनशिप में,
एक रात सुवर ने चुम्बन लिया मुर्गी का,
सुबह दोनों मृत पाए गए,
डाक्टरी जांच से पता चला,
सुवर मरा बर्ड फ़्लू से,
मुर्गी मरी स्वाईन फ़्लू से.
मुर्गी भी सुवर को प्रेम करने लगी,
पर यह प्रेम पसंद नहीं आया,
दोनों के घरवालों को,
सुवर और मुर्गी का प्रेम,
न देखा कभी न सुना,
समझाया फिर धमकाया,
पर प्रेम अँधा होता है,
दोनों नहीं माने,
घर छोड़कर भाग गए,
रहने लगे लिव-इन रिलेशनशिप में,
एक रात सुवर ने चुम्बन लिया मुर्गी का,
सुबह दोनों मृत पाए गए,
डाक्टरी जांच से पता चला,
सुवर मरा बर्ड फ़्लू से,
मुर्गी मरी स्वाईन फ़्लू से.
Monday, October 19, 2009
कामनवेल्थ (साझा धन) खेल स्पर्धा शुरू
साझा धन खेल स्पर्धा,
हो गई समय से पहले शुरू,
कल्मादी, हूपर, फेनेल,
जुट गए मल्ल युद्ध में,
दुसरे को नीचा दिखाने की,
खुद को ऊंचा साबित करने की,
अघोषित प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक,
कौन जीतेगा?
कोई भी जीते,
क्या फर्क पड़ता है,
खेल तो हार गए.
Friday, October 9, 2009
निद्रा देवी की कृपा से कामनवेल्थ गेम्स बच गए

आज पार्क में शर्मा जी बहुत खुश थे. लोगों के पूछने पर अपने हाथ में लिया अखवार हिलाते थे और कहते थे, 'आने दो वर्मा को, आज माफ़ी न मंगवाई तो मेरा नाम नहीं'.
किसी की कुछ समझ में नहीं आया तो मिश्रा जी बोले, 'भई आ जाने दो वर्मा जी को सब पता चल जायगा'.
कुछ देर में वर्मा जी आ गए. शर्मा जी ने अखवार उनकी तरफ बढाया और बोले' 'लो पढो इसे और कुछ शर्म बाकी है तो माफ़ी मांगो'. वर्मा जी ने खबर पढ़ी और बोले, 'क्या है यह और किस बात की माफ़ी?'
'अच्छा किस बात की माफ़ी? अरे शर्म करो, भूल गए जब में किसी लेक्चर या प्रेजेंटेशन में सोता हूँ तो मेरा मजाक उडाते हो, बॉस से चुगली लगाते हो और मुझे डांट खिलवाते हो. अब कामनवेल्थ गेम्स फेडरेशन का प्रेसिडेंट प्रेजेंटेशन में सो रहा है तो पूछ रहे हो क्या है यह और किस बात की माफ़ी?'
वर्मा जी से अखवार ले कर हम सबने खबर पढ़ी तो सारी बात समझ में आई.
मिश्रा जी बोले, 'भई वर्मा जी यह बात तो गलत है, शर्मा जी का मजाक उड़ाना, उनकी चुगली करना और बॉस से डांट खिलवाना. अरे भई लेक्चर और प्रेजेंटेशन में सोने वाले तो महान लोग होते हैं. क्या तुमने लोक सभा और विधान सभा में
मंत्रिओं को सोते नहीं देखा? शर्मा जी महान हैं तभी तो सोते हैं,'
सब ने मिश्रा जी की बात का समर्थन किया. वर्मा जी को शर्मा जी से माफ़ी मांगनी पडी.
महान शर्मा जी का सब ने तालियों से अभिनन्दन किया,
मिश्र जी ने कहा, 'अब यह सोते हुए प्रेसिडेंट खेलों की तैयारियों पर पूरा संतोष प्रकट करेंगे. यह भी खुश, भारत सरकार भी खुश, कामनवेल्थ में से अपने-अपने हिस्से की वेल्थ लेने वाले भी खुश. सोचो जरा, अगर यह सोते नहीं तो गए थे कामनवेल्थ खेल दिल्ली से'.
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