भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.

Wednesday, December 17, 2008

चुटकुले इधर उधर से

एक बच्चे की शरारत से मां जब बहुत परेशान हो गई तो उस ने कहा, 'बेटे सो जा वरना गब्बर आ जायेगा'. 
बेटे ने कहा, 'मां, मुझे चोकलेट दो वरना पापा को बता दूँगा की मेरे सोने के बाद यहाँ गब्बर आता है'. 

पुलिस  ने रात के १ बजे  शराब  के  नशे  मैं डूबे  एक  आदमी  को  पकड़  कर  पूछा, 'रात  के एक  बजे  तुम  कहाँ  जा  रहे  हो? 
आदमी, 'मैं  शराब  पीने  के  दुषपरिणाम पर भाषण सुनने  जा  रहा  हूँ'. 
पुलिस, 'इतनी  रात  मैं  तुम्हे  कौन  भाषण देगा?
आदमी, 'मेरी बीवी'.

मुन्ना  भाई, 'सर्किट, बोले  तो  यह  फोर्ड  क्या  है?'
सर्किट, 'भाई, गाड़ी है'.
मुन्ना भाई, 'तो फिर यह ऑक्सफोर्ड क्या  है?
सर्किट, 'बोले  तो, सिंपल है  भाई, इंग्लिश में बैल को ओक्स कहते हैं, इसलिए ऑक्सफोर्ड बोले तो बैलगाडी.'

एक दुकान के बाहर लिखा था: 'इन्सानों की तरह बात करने वाला कुत्ता बिकाऊ है.'
एक आदमी दुकानदार से जाकर बोला: 'मैं उस कुत्ते को देखना चाहता हूं...' दुकानदार ने कहा: 'साथ के कमरे में बैठा है, जा कर मिल लो।'
ग्राहक उस कमरे में गया। कुर्सी पर एक हट्टा-कट्टा कुत्ता बैठा था. पूछा: 'क्यों भई, तुम यहां क्या कर रहे हो?'
कुत्ते ने बताया: 'कर तो मैं बहुत कुछ सकता हूं, लेकिन आजकल इस दुकान की रखवाली करता हूं. इससे पहले अमेरिका के जासूसी महकमे में काम करता था और कई खूंखार आतंकवादियों को पकड़वाया... फिर मैं इंग्लैंड चला गया जहां पुलिस के लिए मुखबरी करता था. एक साल बाद यहां आ गया.'
उस आदमी ने दुकानदार से पूछा: 'इतने गुणवान कुत्ते को आप बेचना क्यों चाहते हैं?'
'अव्वल नम्बर का झूठा है, 'जवाब मिला.

Wednesday, December 10, 2008

कौन ज्यादा परेशान है?

दिल्ली के चुनावों में जनता ने फ़िर कांग्रेस को चुन दिया और चुना भी काफ़ी जोर शोर से. जनता ने तो अपना काम कर दिया, पर राजनीतिबाजों को परेशानी में डाल दिया. भाजपा इसलिए परेशान है कि हार क्यों गए. कांग्रेस इसलिए परेशान है की इतनी सारी सीटों पर जीत कैसे गए. 

भाजपा की परेशानी इतनी बड़ी नहीं है.  बहुत सारे कारण हैं इस हार के. ग़लत मुद्दों पर ज्यादा जोर. सही मुद्दों पर कम जोर. 'कांग्रेस महंगी पड़ी' का नारा ख़ुद भाजपा पर महंगा पड़ गया. 

कांग्रेस की परेशानी बाकई परेशान करने वाली है. कांग्रेस जानती है कि उसकी सरकार ने पिछले ५ वर्षों में बहुत गड़बड़ की है. विकास की जो बात चुनाव प्रसार में कांग्रेस ने की, वह ख़ुद कांग्रेस को झूटी लग रही थी, पर यह जनता को क्या हो गया कि कांग्रेस का यह झूट उस ने सच मान लिया. पाँच साल तक भुगता बहुत कुछ और यकीन कर लिया कि कुछ नहीं भुगता. वाह री दिल्ली की जनता.  

कल मैं ऑटो से आ रहा था. खूब झटके लग रहे थे. ड्राइवर भी परेशान हो गया था, झटके खा-खा कर. गाली देने लगा दिल्ली की सड़कों को, सरकार को. मैंने कहा अब क्या गाली देते होते हो, चुन तो तुमने उसी सरकार को लिया. चुप हो गया बेचारा. फ़िर कुछ देर बाद धीरे से बोला, फ़िर साली गलती करदी. मैंने कहा अब क्या फायदा? पाँच साल भुगतो अब यह गलती. पाँच साल बाद फ़िर यही गलती करना. दिल्ली के लोगों को गलती करने और भुगतने की आदत हो गई है.

कुछ दिन बाद सब सेट हो जायगा. न भाजपा परेशान रहेगी और न कांग्रेस. आने वाले लोकसभा चुनाव में लग जायेंगे दोनों. हमेशा की तरह परेशान रहेगी, दिल्ली की आम जनता.  

Tuesday, December 9, 2008

चार बीबियाँ घर में, मियां अस्पताल में

एक नौजवान का दिमागी संतुलन बिगड़ गया और उसे अस्पताल में भरती कराना पड़ा. वह अपने तलाकशुदा मां-बाप से मिलने को तैयार नहीं था. हुआ यह कि उसके पिता ने अपनी बात ऊंची रखने के लिए उसकी शादी अपने रिश्तेदारी में अपनी पसंद की लड़की से करा दी. जब उस की मां को यह पता चला तो उसे बहुत गुस्सा आया. उसने भी बेटे की शादी अपनी रिश्तेदारी में अपनी पसंद की लड़की से करा दी. मामला बराबर हो गया.

पिता को पता चला तो वह भड़क गया, 'उस औरत की यह हिम्मत कि मुझसे बराबरी करे'. तुंरत उसने बेटे की एक और शादी करवा दी. अब मां की बारी थी. उस से पिता की यह बढ़त बर्दाश्त नहीं हुई. उसने अपनी रिश्तेदारी में एक लड़की पसंद की और बेटे की चौथी शादी करवा दी. बेटा मां-बाप का यह प्यार और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर सका. अब वह अस्पताल में है और मां या बाप किसी का भी नाम सुनने पर भड़क उठता है. 

Thursday, December 4, 2008

बेचारा पप्पू

पप्पू - सोच रहा हूँ नाम बदल लूँ. 
गप्पू - क्यों इस नाम में क्या बुराई है?
पप्पू - पहले नहीं थी, अब हो गई है. इस साले चुनाव आयोग को भी यही नाम मिला था. मैंने वोट डाला था, फ़िर भी लोग मुझे रोक कर पूछते हैं कि आपने वोट क्यों नहीं डाला?
 
पति - वधाई हो,  आज दिल्ली में मतदान है.
पत्नी - इस में वधाई की क्या बात है?
पति - अरे भई, पाँच साल में यह मौका आता है. आज के दिन ऐसा महसूस होता है कि हम भी कुछ हैं.
पत्नी - यह तुम्हें ही महसूस होता है या कोई दूसरा भी यह महसूस करता है कि तुम भी कुछ हो?
पति - पहले तो ऐसा लगता था कि दूसरे भी यह महसूस करते हैं कि हम कुछ हैं, भले वह एक दिन के लिए ही ऐसा महसूस करते हों. पर इस बार तो ऐसा कुछ हुआ ही नहीं. आँखें तरस गईं, कान तरस गए - कोई आएगा, घंटी बजायेगा, हम तने हुए दरवाजा खोलेंगे,  वह हाथ जोड़ कर और कुछ झुक कर कहेगा, 'अपना अमूल्य वोट हमें ही दीजियेगा'. पर इस बार तो यह सपना सपना ही रह गया. कोई नहीं आया इस बार. 
पत्नी - हाँ यह बात तो है. मतदाता का इतना अपमान तो कभी नहीं हुआ. मत दो किसी को वोट इस बार. 
पति - वोट नहीं दूँगा तो चुनाव आयोग मुझे पप्पू कहेगा. 
पत्नी - हाँ यह बात भी है. मतदाता तो बेचारा हर तरफ़ से फंस गया. वोट दें तो दें किसे, कोई भी तो वोट के लायक नहीं  है. वोट न दो तो लोग पप्पू कहेंगे. 
पति - इस से तो अंग्रेजों की गुलामी अच्छी थी. गुलाम थे गुलाम कहलाते थ. अब कहने को तो आजद हो गए हैं, पर वोट तक डालने की तो आजादी नहीं है. यह सीट आरक्षित है, यानी अब कुछ लोगों में से ही अपना प्रतिनिधि चुन सकते हैं. रमाकांत पंडित हैं, पूरी तरह योग्य हैं, पर उन्हें नहीं चुन सकते क्योंकि वह आरक्षित वर्ग के नहीं हैं.
पत्नी - हाँ यह बात तो है. आजादी भी कुछ लोगों के लिए आरक्षित हो गई है. बाकी तो सब अब भी गुलाम हैं. 
   

Monday, December 1, 2008

सरकार ने सख्त कदम उठाये

त्रियंका - मॉम अब आपको जरूर कुछ करना चाहिए. 
नोनिया - क्यों बेटी, इस बार क्या खास बात हो गई?
त्रियंका - इस बार उन्होंने उस होटल पर अटेक कर दिया जिस में हम जैसे खास लोग ठहरते हैं. 
नोनिया - अरे हाँ, यह तो मैंने सोचा ही नहीं. 
काहिल - यस् मॉम, यह तो हद कर दी इन आतंकिओं ने. इनकी हिम्मत इतनी हो गई कि आम आदमियों के साथ-साथ खास आदमिओं पर भी अटेक करने लगे. इस तरह तो हमारा बाहर निकलना ही बंद हो जायेगा. 
नोनिया -  तुम सही कहते हो. बेटी, फोन लगाओ तनमोहन अंकल को. 
त्रियंका- हेलो अंकल, मॉम बात करेंगी.
नोनिया - हेलो तनमोहन, क्या कर रहे थे?
तनमोहन - पांय लागूं मैडम, बस जरा आँख लग गई थी.
नोनिया - तुम बहुत सुस्त हो गए हो, अब दोपहर में भी सोने लगे.
तनमोहन - क्या करुँ मैडम, काम तो कुछ है नहीं. 
नोनिया - ठीक है, पर आज कल तो जगे रहो. मुंबई में आतंकी हमला हुआ है. मीडिया को भनक मिल गई तो मुश्किल हो जायेगी. तानिशेक ननु को सफाई के बयान देने पड़ेंगे. 
तनमोहन - जी मैडम, अब ध्यान रखूंगा. क्या आज्ञा है? 
नोनिया - भई इस बार कुछ करना होगा. त्रियंका नाराज हो रही है. इस बार तो आतंकियों ने उसके फेवरेट होटल पर ही अटेक कर दिया है. इस साल नए साल की पार्टी वह इस होटल में करना चाहती थी.
तनमोहन - शेशमुख ने तो पहले ही इलीट फोर्स लगा दी है. सारे इलीट सिटीजन इस बात से खुश हैं कि उनकी रक्षा इलीट फोर्स कर रही है. त्रियंका बेटी अब और क्या चाहती हैं. क्या लिलानी को फोन कर दूँ कि आपको यह बात बुरी लगी है. आम आदमियों तक तो मारा-मारी ठीक है, खास आदमियों की तरफ न देखें. 
नोनिया - यह तो करो, पर कुछ लोगों को लटकाना भी होगा. पाटिल से कहो अब आराम करे. इस बार पब्लिक में नाराजी कुछ ज्यादा ही है. हर बार से कुछ ज्यादा करना होगा इस बार. 
तनमोहन - आप सही कह रही हैं मैडम. यह आम आदमी भी अजीब हैं, ख़ुद मर रहे थे तो कम नाराज थे, कुछ खास आदमी मर गए तो ज्यादा नाराज हो गए. 
नोनिया - यह आम आदमी मेरी समझ में भी नहीं आए, पर हमें कुर्सी पर तो यह लोग ही बैठाते हैं. इनके लिए कुछ करो मत पर कहते रहो. इस बार कुछ ज्यादा कहो और करने का नाटक भी करो. मैं कार्य समिति की बैठक बुलाती हूँ. तुम सब दलों को इकठ्ठा करो. मैं त्रियंका से सलाह करती हूँ. कुछ ऐसा करना होगा कि आतंक पर हम कुछ कर रहे हैं ऐसा लगे. अगले साल चुनाव भी तो जीतना है. 
तनमोहन - आप सही कह रही हैं मैडम. मैं काम पर लगता हूँ. पांय लागूं मैडम.
निनिया - सुखी रहो. कुर्सी पर जमे रहो. 

Saturday, November 29, 2008

चुटकले नेताओं के

नेताजी अपनी बड़ी सी वेन में चले जा रहे थे कि उन्होंने देखा कि एक मैदान में एक आदमी, एक औरत और दो बच्चे घास खा रहे हैं. उन्होंने वेन रुकवाई और उनके पास जाकर पूछा तो आदमी बोला, 'हमारे पास न रोजगार है और न ही खाने को अनाज. कई दिन से हम घास खा कर गुजारा कर रहे हैं'.
नेता जी की आंखों में आंसू आ गए, बोले, 'तुम सब मेरे घर चलो'. 
उस आदमी को यह सुन कर आश्चर्य हुआ, पर कुछ सोच कर वह अपने परिवार के साथ वेन में बैठ गया. कुछ आगे चलने पर वह बोला, 'आप जैसे दयालु नेता कम ही होते हैं जो भूखे आदमियों को खाना खिलाएं'.
नेता जी कहा, 'अरे ऐसी कोई बात नहीं है, मैं जो भी कर रहा हूँ एक नेता होने के नाते ही कर रहा हूँ. मैं तुमें खाना खिलाने नहीं ले जा रहा हूँ. दरअसल बात यह है कि मेरे गार्डन में दो-दो फुट घास उग आई है. मैं तम्हें वह घास खिलाने ले जा रहा हूँ'. 

एक विमान का अपहरण हो गया जिसमें सौ से ज्यादा नेता सवार थे. यह ख़बर सुन कर जनता खुशी से नाचने लगी. लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं रही, अपहरणकर्ता  ने कहा कि अगर हमारी मांगे नहीं मानी गईं तो हम एक-एक करके नेताओं को रिहा करना शुरू कर देंगे'. 

महा-नेता राज ठाकरे और उनके वीर महा-सैनिक मुंबई हमले के दौरान कहाँ छिपे रहे यह उन्हें भी नहीं पता. गैर-महामानुस गए मुंबई को बचाने. 

Sunday, November 23, 2008

गोरिल्ला

यह विडियो देखिये, शायद आप को हँसी आ जाय.


Monday, November 17, 2008

किताबी प्रजातंत्र

किताबों में पढ़ी थी, 
प्रजातंत्र की परिभाषा,
अब पता चला, 
भारत एक राजतान्त्रिक देश है,
जनता द्वारा चुने जाने के बाद,
जन-प्रतिनिधि राजा हो जाते हैं
और सत्ता की राजनीति चलाते हैं.

Friday, November 14, 2008

चुनाव आयोग और पप्पू कार्ड्स

चुनाव आयोग ने कहा,
पप्पू मत बनो वोट डालो,
पर ख़ुद बन गया पप्पू,
क्या पप्पू कार्ड बनाये हैं,
नाम ग़लत तो पता सही है,
पता ग़लत तो नाम सही है,
नाम किसी का,
फोटो किसी का,
पप्पू ने कर दिया बंटवारा,
एक भाई लक्ष्मी नगर में,
दूसरा भाई शक्ति नगर में,
माल पी गए पप्पू,
पैसा खा गए पप्पू,
पप्पू कार्ड बना कर,
बना दिया वोटर को पप्पू,
बोलो चुनाव आयोग की जय,
पप्पू महाराज की जय.

Wednesday, November 12, 2008

मंहगाई

नेतानी जी ने कहा,
कहाँ है मंहगाई?
मुझे तो आज तक मिलने नहीं आई,
न ही किसी नागरिक ने फोन किया,
कि शहर में मंहगाई है आई,
चुनाव आए तो बहकाने लगे जनता को,
इन लोगों को शर्म भी नहीं आई.

एक प्यारा सा चुटकुला

बहुत पहले की बात है. एक मुग़ल शहजादे ने अपनी प्रेमिका को दो कबूतर दिए. एक कबूतर उड़ गया. शहजादे ने पूछा, कबूतर कैसे उड़ गया? प्रेमिका ने दूसरा कबूतर उड़ाते हुए कहा, 'ऐसे'. 

बहुत जन्मों के बाद वह फ़िर मिले और शादी करली. प्रेमी-प्रेमिका से पति-पत्नी हो गए. 

विवाह की पहली वर्षगाँठ पर पति ने पत्नी को एक अच्छा उपहार देने का फ़ैसला किया. बहुत सोचने के बाद उसने तय किया कि वह एक मोबाइल उपहार में देगा. पत्नी को यह उपहार बहुत पसंद आया. बदले में पति को एक प्यारा सा मीठा सा चुम्बन मिला. पति ने पत्नी को मोबाइल प्रयोग करना अच्ची तरह समझा दिया. 

एक दिन पत्नी सुपर मार्केट गई. वहां उस के मोबाइल पर उस के पति का फ़ोन आया, 'प्रिय, तुम्हें उपहार कैसा लगा?'

पत्नी ने कहा, 'बहुत प्यारा, पर एक बात समझ में नहीं आई.'

'वह क्या', पति ने पूछा. 

'तुम्हें कैसे पता लगा कि मैं सुपर मार्केट में हूँ?' पत्नी बोली. 

Saturday, November 8, 2008

अल्पसंख्यक हिंदू

पति - अजी वधाई हो, भारत में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं.
पत्नी - वह कैसे?
पति - भारत में मुसलमान हैं, सिख हैं, ईसाई हैं, जैन, बोद्ध, पारसी, दलित हैं, और हैं .........
पत्नी - और कौन?
पति - वह जो पैदा हिंदू हुए पर धरम बदलकर बुद्दिजीवी हो गए.
पत्नी - यह बात तो सही है. चलो अच्छा हुआ, अब हमें वह सब सुविधाएं मिलेंगी जो अब तक इन्हें मिलती रही हैं. पर एक बात बताओ, इस तरह बहुसंख्यक कौन रहा?
पति - अरे भाई अब तो मुसलमान बहुसंख्यक हो जायंगे.
पत्नी - चलो यह भी अच्छा हुआ, अब इन्हें अल्पसंख्यक होने का मलाल नहीं रहेगा. 

Thursday, November 6, 2008

ट्रेफिक जाम

लोगों ने ट्रेफिक जाम लगाया,
लोगों ने ट्रेफिक जाम हटाया,
पुलिस चेक पोस्ट पर बैठी रही,
गाड़ियों को रोकती रही,
जेब गरम करती रही.

Wednesday, November 5, 2008

गंगा सीरिअल रीमेक

आप को याद होगा कुछ साल पहले एक सीरिअल आया था - 'हम देखेंगे गंगा साफ़ हो'. वह सीरिअल तो फ्लाप हो गया था, गंगा और गन्दी हो गई. हाँ जनता का पैसा सरकारी खजाने से जरूर साफ़ हो गया. 

अब उस फ़िल्म कम्पनी ने इस सीरिअल का रीमेक बनाया है - 'गंगा एक राष्ट्रीय नदी'. कलाकार दूसरे हैं. देखिये इस बार क्या होता है? जनता का कितना पैसा नेताओं की जेब में जाता है? 

Tuesday, November 4, 2008

दलित और सवर्ण

मंत्री जी दलित थे,
चपरासी सवर्ण था,
मंत्री जी कोठी में रहते थे,
चपरासी आउट हाउस  में, 
मंत्री जी का बेटा पढ़ता था पब्लिक स्कूल में,
चपरासी का बेटा सरकारी स्कूल में,
दोनों परीक्षा में बैठे बनने को डाक्टर,
मंत्री का बेटा लाया २० प्रतिशत,
आरक्षित स्थान पर प्रवेश पा गया,
चपरासी का बेटा लाया ८० प्रतिशत,
पर बेचारा गच्चा खा गया,
मंत्री जी दलित थे,
चपरासी सवर्ण था. 
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