भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.

Saturday, March 16, 2013

व्यंग पर व्यंग

सरकार पर लिखा है मैंने एक व्यंग,
सुनोगे?

सरकार पर व्यंग,
यह कैसे संभव है?
सरकार तो खुद है एक व्यंग,
एक संपूर्ण राष्ट्रीय व्यंग |

व्यंग पर व्यंग?
यह भूल मत करना,
वरना छलक उठेगा,
करुणा रस,
रचा पगा बीभत्स रस में |

1 comment:

sunnymca said...

accha vyang hai..

http://sunnymca.wordpress.com/2013/08/25/no-shame-in-scam/

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