भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.

Monday, November 17, 2008

किताबी प्रजातंत्र

किताबों में पढ़ी थी, 
प्रजातंत्र की परिभाषा,
अब पता चला, 
भारत एक राजतान्त्रिक देश है,
जनता द्वारा चुने जाने के बाद,
जन-प्रतिनिधि राजा हो जाते हैं
और सत्ता की राजनीति चलाते हैं.

4 comments:

श्यामल सुमन said...

हजारों जुर्म करके भी फिरें उजल लिबासों में।
करिश्में हैं सियासत के,वकीलों के,अदलत के।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुनदर लगा आप का यह किताबी प्रजातंत्र
धन्यवाद

samiir said...

किताबों में जो लिखा है उस से धंधा नहीं चलता. बेचारे नेता प्रजातंत्र चलायें या अपना धंधा चलायें?

अनुपम अग्रवाल said...

कितनी गूढ़ बात .
अच्छी अभिव्यक्ति .

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