भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.

Monday, January 12, 2009

नए साल पर नया धंधा

हमने एक मन्दिर बनाया,
भगवान को उस में बिठाया,
एक बड़ा संदूक ला कर,
उस पर दान पात्र लिखवा कर,
मोटा एक ताला लगा कर,
नए साल पर धूम-धाम से,
खोली एक नई दूकान,
धंधा चले खूब भगवान.

हम दहेज़ के ख़िलाफ़ हैं,
हमें कुछ नहीं चाहिए,
आपकी बेटी है,
आप चाहेंगे सुख से रहे,
उसे जो देंगे और देते रहेंगे,
आपके और उसके बीच की बात है. 

पडोसन बोली,
कब कर रही हो बेटे की शादी?
बेटे को पढाया, लिखाया,
हर तरह से काबिल बनाया,
अब वह अपने पैरों पर खड़ा है,
न जाने क्यों इस बात पर अडा है,
मास्टर जी का बेटा पसंद है उसे,
कहता है उसी से करूंगा शादी.


2 comments:

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर लिखा है।

राज भाटिय़ा said...

एक से बढ कर एक, सब से ऊपर वाला ओर सब से नीचे वाला आज की सचाई है.
धन्यवाद

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