भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.

Friday, January 16, 2009

काम सरकार का, क्रेडिट राजमाता को

सरकार ने मीडिया पर लगाम कसने की बात की तो हल्ला मच गया. मुंबई हमलों में यह तो सबने देखा है कि जैसे गोली-पर-गोली रिपोर्टिंग की जा रही थी उस से आतंकियों को फायदा तो जरूर हुआ. अन्दर बैठकर उन्हें पता चल रहा था कि बाहर क्या हो रहा है. पर मीडिया की भी अपनी मजबूरी है. कम्पटीशन इतना ज्यादा है कि एंकरों को बार-बार यह कहना पड़ता था कि यह जो आप देख रहे हैं बस हमारा चेनल ही आपको दिखा रहा है. अब हर बात का क्रेडिट लेने पर राजनीतिबाजों का तो एकाधिकार नहीं हो सकता. मीडिया को भी यह अधिकार मिलना चाहिए. 

मीडिया वाले प्रधान मंत्री से मिले और उन्होंने पूर्ण आश्वासन दे दिया कि बहुत सोच-समझ और विचार-विमर्श के बाद ही कानून में कोई बदलाव किया जायेगा. प्रधान मंत्री सरकार के प्रमुख हैं. उनके आश्वासन से मीडिया आश्वस्त हो गया. इस बात का क्रेडिट प्रधान मंत्री को मिल गया. लेकिन कांग्रेस की मालकिन और राजमाता को तो कोई क्रेडिट नहीं मिला. यह बात ग़लत हो गई. मीडिया वालों को तुंरत राजमाता के दरबार में हाज़िर होने की हिदायत दी गई. वह हाज़िर हुए और राजमाता ने आदेश दिया कि सरकार कानून में ऐसा कोई बदलाव नहीं करेगी. अब आप यह पूछ सकते हैं कि राजमाता कोई सरकारमाता तो हैं नहीं, उन्होंने कैसे यह कह दिया कि सरकार यह नहीं करेगी? पूछिए,जरूर पूछिए. अब मेरा भी जवाब सुन लीजिये. आप भारत में रहते हैं या कहीं और? 

जब कांग्रेस और करात में ऊपरी दोस्ती थी तो प्रधान मंत्री अक्सर कुछ ऐसा कह देते थे कि करात नाराज हो आते थे. फ़िर राजमाता की और से उनके प्रिय चाटुकार  प्रणब करात के पास जाते थे और मनमोहन जी को माफ़ करवाते थे, करात का गुस्सा ठंडा करवाते थे. सारा क्रेडिट राजमाता को मिलता था. अब देखिये, इंग्लेंड से आए विदेश सचिव ने मुंबई मामले पर भारत सरकार की हर बात को दुत्कार दिया, 'मैं नहीं मानता कि पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियां इन हमलों में शामिल थीं. मैं यह भी नहीं मानता कि इन हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकियों को भारत के हवाले किया जाय. इन पर पाकिस्तान में ही मुकदमा चलेगा.' सरकार की फुस-फुस हो गई. सरकारी प्रवक्ता ने इसे सचिव महोदय की व्यक्तिगत राय कह कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली. अब राजमाता ने सचिव महोदय को राहुल बाबा के साथ अमेठी घूमने भेज दिया है. वहां बाबा उन्हें क्या दिखा रहे हैं यह तो आपको बाबा या सचिव से पूचना पड़ेगा? इस बारे में हम कोई अनुमान भी नहीं लगा सकते. एक आम आदमी, राजा लोग जब ऐसे घूमने जाते हैं तो क्या करते हैं उसका अनुमान कैसे लगा सकता है? हाँ  अगर किसी वजह से सचिव महोदय ने अपनी व्यक्तिगत राय बदल दी तो इस का क्रेडिट राजमाता को मिल जायेगा. ऐसे बन जायेगी बात. 

2 comments:

Anonymous said...

bahut sahi likha sir jee..

राज भाटिय़ा said...

भाड मै जाये.... चमचो की यह मां
धन्यवाद

Get your website at top in all search engines
Contact Rajat Gupta at
9810213037, or
Go to his site

For free advice on management systems - ISO 9001, ISO 14001, OHSAS 18001, ISO 22000, SA 8000 etc.
Contact S. C. Gupta at 9810073862
e-mail to qmsservices@gmail.com
Visit http://qmsservices.blogspot.com