भ्रष्टाचार है - तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, कानून की अवहेलना, योग्यता के मुकाबले निजी पसंद को तरजीह देना, रिश्वत लेना, कामचोरी, अपने कर्तव्य का पालन न करना, सरकार में आज कल यही हो रहा है. बेशर्मी भी शर्मसार हो गई है अब तो.

Tuesday, December 9, 2008

चार बीबियाँ घर में, मियां अस्पताल में

एक नौजवान का दिमागी संतुलन बिगड़ गया और उसे अस्पताल में भरती कराना पड़ा. वह अपने तलाकशुदा मां-बाप से मिलने को तैयार नहीं था. हुआ यह कि उसके पिता ने अपनी बात ऊंची रखने के लिए उसकी शादी अपने रिश्तेदारी में अपनी पसंद की लड़की से करा दी. जब उस की मां को यह पता चला तो उसे बहुत गुस्सा आया. उसने भी बेटे की शादी अपनी रिश्तेदारी में अपनी पसंद की लड़की से करा दी. मामला बराबर हो गया.

पिता को पता चला तो वह भड़क गया, 'उस औरत की यह हिम्मत कि मुझसे बराबरी करे'. तुंरत उसने बेटे की एक और शादी करवा दी. अब मां की बारी थी. उस से पिता की यह बढ़त बर्दाश्त नहीं हुई. उसने अपनी रिश्तेदारी में एक लड़की पसंद की और बेटे की चौथी शादी करवा दी. बेटा मां-बाप का यह प्यार और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर सका. अब वह अस्पताल में है और मां या बाप किसी का भी नाम सुनने पर भड़क उठता है. 

4 comments:

seema gupta said...

" उफ़,ये तो हादसा हो गया उसके साथ, भगवान उसे ठीक करे और हौसला दे और उसके माँ बाप को बुद्धि दे'

regards

सौरभ कुदेशिया said...

samajh main nahi aa raha ki hase ki roye.. ha ha ha...

Alag sa said...

एकबार, दो बार, तीन बार, चार बार लड़का था कि काठ का गुड्डा। जिधर उठाया उठ गया, जिधर बैठाया बैठ गया।

विपिन said...

बहुत खूब.

अस्पताल तो जायेगा ही. लोगों को एक बीबी ही भारी पड़ती है, यह बेचारा तो चार बीबियों का मारा हुआ है.

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